प्राणवायु

तुम्हें
न जानने से
जानने तक की
यात्रा में
फेसबुक भी देता है
एक रास्ता
या-
कहूँ कि
एक वातायन
जो
खुलता है
निरभ्र नीले आकाश की तरफ

जो देता है
हौसला
‘कल्पना’ के पंखों को
खोलने का

जिधर से
आती रहती है
कुछ रोशनी
‘प्रेरणा’ की…

और
जरूरत भर
‘प्राणवायु’ भी
जीवंत रहने के लिए …!
____________________

Advertisements